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Supreme Court To Hear Case Related Places Of Worship Act 1991 Today Last Time Answer Was Sought From Center


Places of Worship Act 1991 Hearing: पूजा स्थल कानून 1991 (Places of Worship Act 1991) को लेकर विवाद पर आज सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई होगी. सर्वोच्च न्यायालय (SC) में पूजा स्थल कानून के कुछ प्रावधानों को चुनौती देने वाली छह याचिकाओं की सुनवाई होनी है. 9 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र (GOI) को नोटिस जारी करते हुए दो हफ्तों में जवाब दाखिल करने के लिए कहा था. शीर्ष अदालत ने कहा था कि सुनवाई के बीच वाराणसी (Varanasi) और मथुरा (Mathura) की कार्यवाही पर रोक नहीं लगेगी. 

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ मामले पर सुनवाई कर रही है. पूजा स्थल कानून 1991 के कुछ प्रावधानों को चुनौती देने वाली ये याचिकाएं सेना के रिटायर्ड अधिकारी अनिल काबोत्रा, वकील चंद्रशेखर, देवकीनंदन ठाकुर, स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती, रुद्र विक्रम सिंह और बीजेपी के पूर्व सांसद चिंतामणि मालवीय ने दाखिल की हैं. 

डेढ़ साल से केंद्र ने दे सका है जवाब

याचिकाकर्ता अनिल काबोत्रा ने पूजा स्थल कानून 1991 की धारा 2, 3 और 4 की संवैधानिकता को चुनौती दी है. उनका कहना है कि इन धाराओं से धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत का उल्लंघन होता है. 

सुप्रीम कोर्ट ने 12 मार्च 2021 को भी केंद्र को नोटिस जारी कर मामले पर स्पष्टीकरण मांगा था लेकिन लगभग डेढ़ साल की अवधि में सरकार ने की ओर से अदालत में जवाब दाखिल नहीं किया जा सका है. 

क्या कहता है कानून

पूजा स्थल कानून 1991 के मुताबिक, 15 अगस्त 1947 को धार्मिक स्थलों की स्थिति जैसी थी, उन्हें वैसा ही रखा जाएगा लेकिन अयोध्या के राम मंदिर के मामले को इससे अलग रखा गया. अयोध्या का मामला आजादी के पहले से अदालत में चल रहा था, इसलिए उसे इसमें छूट गई थी. कानून का उल्लंघन करने वालों के लिए सजा का प्रावधान किया गया. सजा या जुर्माना मामले के हिसाब से तय होंगे. 1991 में कांग्रेस की पीवी नरसिम्हा सरकार देश में सांप्रदायिक तनाव को दूर करने के लिए ये कानून लाई थी.

1991 में ही यह कानून बनने के बाद वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वे कराने को लेकर कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी. इस पर मस्जिद प्रबंधन की ओर से पूजा स्थल कानून का हवाला देते हुए याचिका को खारिज करने की मांग की गई थी. 1993 नें इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद से संबंधित सुनवाई पर रोक लगा दी थी और मौके पर यथास्थिति बरकरार रखने का फैसला सुनाया था. 

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